Beparwaah Zindagi / बेपरवाह ज़िंदगी (Poetry On Childhood)

 

Beparwaah Zindagi / बेपरवाह ज़िंदगी (Poetry On Childhood)     कुछ बातें याद हैं तो कुछ हम भूल गए  पर भूले नहीं अपने बचपन की वो शैतानियां  सताती थी जो सबको बेवजह सुबह और शाम  मिलती थी सज़ा हमें, आज भी याद हैं वो मार  फिर भी सोचते हैं क्यो गुजर गया वो बचपन  क्यों हमसे हो गई दूर वो बेपरवाह ज़िंदगी  जानते हैं आयेंगे नहीं दिन वो लौटकर कभी वापिस  इसलिए अपनी यादों के झरोखे में रखा हैं हमने संजो के उन्हे  कुछ बातें याद हैं तो कुछ हम भूल गए  पर भूले नहीं अपने बचपन की वो शैतानियां     -दीपिका जैन

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Beparwaah Zindagi / बेपरवाह ज़िंदगी (Poetry On Childhood)

 

कुछ बातें याद हैं तो कुछ हम भूल गए

पर भूले नहीं अपने बचपन की वो शैतानियां

सताती थी जो सबको बेवजह सुबह और शाम

मिलती थी सज़ा हमें, आज भी याद हैं वो मार

फिर भी सोचते हैं क्यो गुजर गया वो बचपन

क्यों हमसे हो गई दूर वो बेपरवाह ज़िंदगी

जानते हैं आयेंगे नहीं दिन वो लौटकर कभी वापिस

इसलिए अपनी यादों के झरोखे में रखा हैं हमने संजो के उन्हे

कुछ बातें याद हैं तो कुछ हम भूल गए

पर भूले नहीं अपने बचपन की वो शैतानियां

 

-दीपिका जैन

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