Zameen Pe Khuda / जमीन पे खुदा (Poetry On Mother)
Zameen Pe Khuda / जमीन पे खुदा (Poetry On
Mother)
माँ, ये वो शब्द हैं जिसे सीखा था सबसे पहले बोलना मैने
यूँ तो हैं यह छोटा-सा, पर सम्पूर्ण संसार समाया हैं इसमें
ताक़त हैं ये मेरी, ये ही मेरी वर्णनातीत खूबसूरत दुनिया
इस बिन अस्तित्व नहीं कोई मेरा,
अधूरा हैं जीवन सारा
करवाया हैं इसने मुझे दुनिया से रूबरू, अहसान इसका
माँ, ये वो शब्द हैं जिसे सीखा था सबसे पहले बोलना
मैने
अगर लिखने बैठूँ इसके बारें में तो
मिलेंगे नहीं अल्फ़ाज़
कहता हैं दिल ये मेरा, स्वयं ख़ुदा हैं ये, उतरा हैं जो ज़मीं पे
अब उस ख़ुदा की क्या तारीफ़ करूँ,
जिससे हैं जीवन मेरा
माँ, ये वो शब्द हैं जिसे सीखा था सबसे पहले बोलना मैने

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