Mann Ke Haare Haar, Mann ke Jeete Jeet / मन के हारे हार, मन के जीते जीत ( Poetry On Positivity In Life)
Mann Ke Haare Haar, Mann ke Jeete Jeet / मन के हारे हार, मन के जीते जीत ( Poetry On
Positivity In Life)
ना ही था मंज़िल का इल्म, ना ही वो मुझे नज़र आ रही थी
ना ही कोई था हमसफ़र, फिर भी क़दम बढ़ते जा रहे थे
राहें थी बेशुमार काँटों से भरी, पर स्पर्श
उनका था फूलों सा
शायद ये जुनून था मेरा, अपने सपनों को मुकम्मल करने का
चाह थी ज़माने की निगाहों में ख़ुद का एक अस्तित्व बनाने
की
हुई सफल मेहनत, यक़ीनन मिली कामयाबी, छू लिया आसमान
और सीख लिया जीवन-मंत्र, मन के हारे हार हैं मन के जीते जीत
ना ही था मंज़िल का इल्म, ना ही वो मुझे नज़र आ रही थी
ना ही कोई था हमसफ़र, फिर भी क़दम बढ़ते जा रहे थे
-दीपिका जैन

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