Garv Hain Ki Main Naari Hun (Poetry On Women's Day)


गर्व हैं मुझको कि मैं हूँ नारी
झुका लूँ दुनिया कदमों में सारी
लाख बंदिशें लगा दो तुम मुझ पर
चाहो तो बाँध दो ज़ंजीरो से 
देखते ही रह जाओगे तुम
उड़ जाऊँगी मैं, जब तोड़कर सारे बंधन

गर्व हैं मुझको कि मैं हूं नारी
झुका लूँ दुनिया कदमों में सारी
समझना ना तुम मुझको कमज़ोर,
आता हैं मुझको मुश्किलों से लड़ना
अगर टकरा गयी एक बार तुमसे
तो बिखर जाओगे तुम टूटकर

गर्व हैं मुझको कि मैं हूं नारी
झुका लूँ दुनिया कदमों में सारी
कहना चाहती हूँ मैं बस तुमसे इतना
करोगे अगर तुम इज्जत मेरी
तो मुझसे इज्जत ही पाओगे
नही तो मेरे रौद्र रूप से रुबरू हो जाओगे

गर्व हैं मुझको कि मैं हूं नारी
झुका लूँ दुनिया कदमों में सारी
देखे हैं मैंने भी कुछ सपनें
चाहती हूँ करना उनको मुक़म्मल
हासिल कर मुकाम कोई जिन्दगी में
चाहती हूँ जीना होकर बेफिक्र
गर्व हैं मुझको कि मैं हूं नारी
झुका लूँ दुनिया कदमों में सारी

दीपिका जैन 

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