Kashish Phoolon Ki (Poetry On Flowers)
ना जाने कैसी कशिश होती हैं इन फूलों की महक में
जो करती हैं आकर्षित हर शख्स को अपनी ओर
भवरें भी तो मंडराते रहते हैं इनके चहुँ ओर दीवाने से
बगिया का भी सँवर जाता हैं रूप इनके खिल जाने से
खूबसूरत नज़र आती हैं ये फ़िजा इनके मुस्कुराने से
काबिले तारीफ होते हैं ये, धरा का शृंगार होते
हैं ये फूल
ना जाने कैसी कशिश होती हैं इन फूलों की महक में
जो करती हैं आकर्षित हर शख्स को अपनी ओर
फूलो की क्या हैं अहमियत पूछे कोई इश्क़ करने वालो
से
ये तो प्रेमियों के इज़हार-ए-इश्क़ के गवाह भी बन जाते हैं
कह नही पाते जुबां से अपनी जो आशिक़ ये कह जाते हैं
रुठे हुए महबूब के लबों पे तो ये पल भर मे ही मुस्कान लाते हैं
ना जाने कैसी कशिश होती हैं इन फूलों की महक में
जो करती हैं आकर्षित हर शख्स को अपनी ओर

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