Beraham Sardee (Poetry On Winter)



ठिठुर रहे हैं देखो चहुँ ओर सब
फिर भी रहम ना करे बेरहम सर्दी
बच्चे हो या बूढ़े या हो जवान
हैं परेशान सब इस मौसम से
स्वेटर किसी से भी उतारे ना जाए
और रजाई से तो निकला ही ना जाए
ठिठुर रहे हैं देखो चहुँ ओर सब
फिर भी रहम ना करे बेरहम सर्दी
घबराकर सब जन पानी से भागे दूर
नहाना तो जैसे भूल ही गए सब
ये धूप भी तो कोई असर ना दिखाए
मानो सूरज को भी लग गई हो ठण्ड
ठिठुर रहे हैं देखो चहुँ ओर सब
फिर भी रहम ना करे बेरहम सर्दी

टिप्पणियाँ

लोकप्रिय पोस्ट