Tajurbe Se Roobaru (Poetry On Life)
आज ज़िन्दगी ने एक नये तजुर्बे से रुबरु करवाया
जिन्हे
समझते रहे हम अपना करते रहे यकीं उन पे
जख्म दिए
उन्ही अपनों ने गैरों ने इलाज़ करवाया
यूँ तो
कोई शिकवा या शिकायत नहीं हैं मुझे
उनसे
लेकिन
क्यो उन्होने मुझे तन्हाई का अहसास करवाया
यूँ तो
हमसफर थे हम साथ चल रहा था सफ़र हमारा
फिर भी
उन्होने हमें बेगानों की कश्ती में सवार
करवाया
रह गयी
होगी कुछ कमी मुझसे ही रिश्ता निभाने में इसलिए
आज
ज़िन्दगी ने एक नये तजुर्बे से रुबरु करवाया

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