Guroor Hain Beti ( Poetry On Daughter's Day)
बगिया में महकती हुई कली होती हैं बेटी
अंधेरों में जलता हुआ चिराग होती हैं
बेटी
ख़ामोशी के आलम में मधुर संगीत होती हैं बेटी
हो जहाँ खुशियाँ उस घर की पहचान होती हैं
बेटी
सभी के होठों पे आ जाए वो मुस्कान होती हैं बेटी
बगिया में महकती हुई कली होती हैं बेटी
अंधेरों में जलता हुआ चिराग होती हैं
बेटी
कभी ना टूटे वो पिता का गुरूर होती हैं
बेटी
हर वक़्त साथ निभाए माँ की वो परछाई होती हैं बेटी
देख जिसे ख़ुदा भी मुस्कुराए ऐसी रचना
होती हैं बेटी
बगिया में महकती हुई कली होती हैं बेटी
अंधेरों में जलता हुआ चिराग होती हैं
बेटी

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