Zid (Poetry On Success)
अनजानी राहों से गुज़रता जा रहा था, कारवां
ज़िन्दगी का
चलते जा रहे थे बेख़बर मुश्किलों से, मंज़िल
की तलाश में
कुछ कर गुजरने का था जुनून
दिल में शायद हमारे
इसलिए बेपरवाह बढ़ रहे थे क़दम काँटो से भरी राहों में
बस अब वक़्त था तो ख़्वाबों को मुक़म्मल करने का
बस एक बार ज़िन्दगी में आसमां को छू लेने का
अनजानी राहों से गुज़रता जा रहा था, कारवां
ज़िन्दगी का
चलते जा रहे थे बेख़बर मुश्किलों से, मंज़िल
की तलाश में
मिल गयी मंज़िल हमें आ गयी मुस्कान लबों पे
यूँ तो सफ़र ये होगा ना आसां वाकिफ़ थे हम
मुमकिन बनाया ये सफर उम्मीदों ने हमारी
ज़िन्दगी में कभी ना हार मानने की ज़िद ने
हमारी
अनजानी राहों से गुज़रता जा रहा था, कारवां
ज़िन्दगी का
चलते जा रहे थे बेख़बर मुश्किलों से, मंज़िल
की तलाश में

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