Yaaron Sang Yaadein (Poetry On Friendship Day)
कुछ
यूँ खो जाते हैं हम पुरानी यादों में
मिलते
हैं जब बरसों बाद यारों से अपनें
एक
पल मुस्काते तो अगले ही पल बहाते आँसू हैं
याद
कर उन लम्हों को जो फिर कभी नहीं आते
कहते
हैं दोस्ती ख़ुदा का दिया तोहफ़ा हैं कोई
और
दोस्त हैं फ़रिश्ते जो हमारी ज़िंदगी मे हैं आते
कुछ
यूँ खो जाते हैं हम पुरानी यादों में
मिलते
हैं जब बरसों बाद यारों से अपनें
रहता
हैं इंतज़ार दोस्तों से मिलने का
कुछ
अपनी कहनें कुछ उनकी सुनने का
भूल
जाते हैं सब गिले-शिकवे मिलते हैं जब दोस्त
लग
जाते हैं गले एक दूसरे के चाहे हो कुछ भी माहौल
कुछ
यूँ खो जाते हैं हम पुरानी यादों में
मिलते
हैं जब बरसों बाद यारों से अपनें
वक़्त
ने कुछ यूँ ली हैं करवट बदल रहा हैं सबकुछ
समय
नहीं हैं मिलने का टूट रहे हैं रिश्ते सारे
फिर
भी शायद कुछ बाकी हैं ज़ज़्बात दोस्तों में
इसलिए
तो निभाते वो अपनी दोस्ती बनाते नहीं बहाने हैं
कुछ
यूँ खो जाते हैं हम पुरानी यादों में
मिलते
हैं जब बरसों बाद यारों से अपनें

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