Churai Hain Khushiya (Poetry On Happiness)


आज मुद्दतों बाद जिंदगी में मेरी
मुस्काते हुए खुशियों ने दी हैं दस्तक
आयी नहीं ये खुद की मर्जी से
इन्हे तो चुराया हैं मैंने बीते हुए लम्हों से
यूँ तो आसूँ भी आ रहे थे नज़र बेशुमार
 पर किया हैं नज़रअंदाज़ मैंने उन्हें
आज मुद्दतों बाद जिंदगी में मेरी 
मुस्काते हुए खुशियों ने दी हैं दस्तक
डरती हूँ मैं कोई ले ना जाए कहीं दूर
 मेरी ही ख़ुशियाँ छीन के मुझसे
शायद फिर जी ना पाऊँ बिन इनके 
क्यों कि आज ख्यालों में ही सही पाया हैं मैंने इन्हे 
आज मुद्दतों बाद जिंदगी में मेरी
 मुस्काते हुए खुशियों ने दी हैं दस्तक

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