Happy Father's Day (Poetry On Father's Day)


मैं हूँ ना संग तुम्हारे 


मैं हूँ ना संग तुम्हारे,कहते हैं जब पापा
सुनकर मिलता हैं दिल को सुकून हमारें
लाए हैं हमको इस दुनिया में जीवनदाता हैं वो हमारें
मिल गयी हो कोई ख़ुशी कुछ इस तरह से वो हमें निहारें
कहते नहीं वो जुबां से पर लगते हैं हम उनको प्यारें
नन्हे-नन्हे क़दमों से सीखा हैं चलना उन्ही के तो सहारें

मैं हूँ ना संग तुम्हारे,कहते हैं जब पापा
सुनकर मिलता हैं दिल को सुकून हमारें
ग़र हो जाए खता कोई तो वो हमको समझाते
पहचान हुनर हमारा हौंसला हैं बढ़ाते
क़ाबलियत से हमारी ज़माने को रुबरु हैं करवाते
हर कदम ज़िन्दगी में एक नया पाठ हैं सिखाते

मैं हूँ ना संग तुम्हारे,कहते हैं जब पापा
सुनकर मिलता हैं दिल को सुकून हमारे
हर ख़्वाहिश हमारी करेंगे पूरी ये वादा हैं वो निभाते
हमारी ख़ुशियों के लिए तो वो दुनिया से भी लड़ जाते
पर भूलकर भी वो अपना अहसान हैं नहीं जताते
ख़ुद रहकर अँधेरों में रोशनी हैं हमारे लिए जलाते
मैं हूँ ना संग तुम्हारे,कहते हैं जब पापा
सुनकर मिलता हैं दिल को सुकून हमारें

टिप्पणियाँ

लोकप्रिय पोस्ट