Grishma Ritu (Poetry On Sun)





ग्रीष्म ऋतु ने अपने आने का अहसास हैं दिया
सूरज की तपिश ने कण-कण हैं झुलसा दिया
बेजुबां ये जानवर गर्मी ने तो इनको तड़पा दिया
पल दो पल के सुकून के लिए हैं तरसा दिया
परिंदों ने भी अपना हाल कुछ यूँ समझा दिया
तलाश रहे हैं हर मुंडेर पे पानी इंसा को दिखा दिया
             मिल जायेंगे मिट्टी में पेड़ सारे ग़र इनको प्यासा ही छोड़ दिया
खत्म हो जाएगी ये कायनात अगर इसको वक्त्त ना दिया
ग्रीष्म ऋतु ने अपने आने का अहसास हैं दिया
सूरज की तपिश ने कण-कण हैं झुलसा दिया

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