Happy Women's Day 2019

तक़दीर बदलती हैं नारी




जिस कद्र अंधेरों को चीरती हुई गुजरती हैं रोशनी 
उसी तरह अपने हौसले से तक़दीर बदलती हैं नारी
 कभी बनकर बेटी, तो कभी बनकर बहु
 जिन्दगी के हर मोड़ पे इम्तिहान हैं वो देती
 फिर भी कभी अपनों से, तो कभी गैरों से 
होठों पे लिए एक मुस्कान मीठी ताने हैं वो सुनती।
जिस कद्र अंधेरों को चीरती हुई गुजरती हैं रोशनी
उसी तरह अपने हौसले से तक़दीर बदलती हैं नारी 

 शायद होती हैं कोई शक्ति अदभुत हर  स्त्री में
       ना कभी वो थकती, तो ना ही कभी वो थमती
       करती ना विचार वो कभी खुद की खुशियों का
       जीती हैं वो अपनों के लिए, अपनों के लिए ही मरती
जिस कद्र अंधेरों को चीरती हुई गुजरती हैं रोशनी 
उसी तरह अपने हौसले से तक़दीर बदलती हैं नारी

ना जाने क्यों कहता रहा हैं ये जमाना युगों-युगों से
दुनिया हैं ये पुरुषों की उनकी मर्ज़ी से हैं चलती
क्यों भूल जाते हैं वो लाई हैं जो इस दुनिया में उनको 
आँका जाता हैं उसको कम, ऐसी क्या हैं उसकी गलती
जिस कद्र अंधेरों को चीरती हुई गुजरती हैं रोशनी 
उसी तरह अपने हौसले से तक़दीर बदलती हैं नारी

घर की चारदीवारी में ही नहीं गुज़ारती वक़्त वो अपना 
बल्कि कर कुछ काम वज़ूद अपना साबित करती
हो ज़िम्मेदारी परिवार की, या हो घर के बाहर की  
मुस्कुराती हुई  हर फ़र्ज़ शिद्दत से वो निभाती
जिस कद्र  अंधेरों को चीरती हुई गुजरती हैं रोशनी 
उसी तरह अपने हौसले से तक़दीर बदलती हैं नारी

यूँ तो माना जाता हैं इसे देवी का स्वरूप 
और वक़्त-वक़्त पे दुनिया हैं इसको पूजती 
कहते हैं नारी ही हैं माँ काली, नारी ही हैं माँ दुर्गा 
फिर क्यों ये दुनिया उसकी  इज़्ज़त नहीं करती 
जिस कद्र अंधेरों को चीरती हुई गुजरती हैं रोशनी 
उसी तरह अपने हौसले से तक़दीर बदलती हैं नारी





     



टिप्पणियाँ

लोकप्रिय पोस्ट