Mrignayani / मृगनयनी (Poetry On Eyes)

Mrignayani / मृगनयनी  (Poetry On Eyes)  क्या नाम दूँ तुझे, मृगनयनी कहूँ, या कहूँ मृगनेत्री हूँ असमंजस में बहुत, किस नाम से पुकारूँ तुझे देखता हूँ जब तेरी आँखों में, ना जाने कहाँ खो जाता हूँ ढूँढता हूँ खुद को ही हर तरफ, पर नज़र नहीं आता हूँ देखी नहीं इतनी खूबसूरती, कायनात में पहले कभी हक़ीक़त है, या है कोई ख्वाब, ढूँढ रहा हूँ जवाब इसका शायद जिक्र नहीं किसी किताब में तेरे इन नैनों का यकीनन मिले नहीं होंगे शब्द लेखक को, इनकी तारीफ़ में क्या नाम दूँ तुझे, मृगनयनी कहूँ, या कहूँ मृगनेत्री हूँ असमंजस में बहुत, किस नाम से पुकारूँ तुझे                           -दीपिका जैन


                                                   Image by Nika Akin from Pixabay


                Mrignayani / मृगनयनी  (Poetry On Eyes)

 

क्या नाम दूँ तुझे, मृगनयनी कहूँ, या कहूँ मृगनेत्री

हूँ असमंजस में बहुत, किस नाम से पुकारूँ तुझे

देखता हूँ जब तेरी आँखों में, ना जाने कहाँ खो जाता हूँ

ढूँढता हूँ खुद को ही हर तरफ, पर नज़र नहीं आता हूँ

देखी नहीं इतनी खूबसूरती, कायनात में पहले कभी

हक़ीक़त है, या है कोई ख्वाब, ढूँढ रहा हूँ जवाब इसका

शायद जिक्र नहीं किसी किताब में तेरे इन नैनों का

यकीनन मिले नहीं होंगे शब्द लेखक को, इनकी तारीफ़ में

क्या नाम दूँ तुझे, मृगनयनी कहूँ, या कहूँ मृगनेत्री

हूँ असमंजस में बहुत, किस नाम से पुकारूँ तुझे

                          -दीपिका जैन

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