Vicharon Ka Sailaab / विचारों का सैलाब (Poetry On Life )
Vicharon Ka Sailaab / विचारों का सैलाब (Poetry
On Life )
अजीब कशमकश है, मन में विचारों का सैलाब है
कभी कोई करता परेशान, तो कभी कोई करता है
किसे दू प्राथमिकता मन में चल रहा यही सवाल है
यकीनन, जीवन के सफर में उथल-पुथल बहुत है
खुद की ख्वाहिशों को तो कर दिया नजरअंदाज है
गैरों के लिए जी रहे, शायद यही किस्मत का अन्दाज है
बहुत कुछ करके भी कुछ ना करने का मिला पुरस्कार है
यही व्यवहार दुनिया का, फ़ितरत बदलने का जिम्मेदार है
फिर भी मिलता नहीं समय खुद के लिए, क्या कारण है
वक्त को किस हक से कहूँ कसूरवार, वो तो बेशुमार है
अजीब कशमकश है, मन में विचारों का सैलाब है
कभी कोई करता परेशान, तो कभी कोई करता है
-दीपिका जैन

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