Awishvasniya / अविश्वसनीय (Poetry On Flowers)
Awishvasniya / अविश्वसनीय (Poetry On Flowers)
कुछ क्षण के लिए ठहर गया वक्त
नजर पड़ी जब मेरी उस नज़ारे पर
अतुलनीय था वो हुआ नहीं यकीन
असंख्य रंगों के थे पुष्प खिले वहाँ
कुछ लुभा रहे थे अपनी मुस्कान से
तो कुछ खिलने को थे आतुर शीघ्र ही
मंडरा रहे थे भँवरें कई उन पर निरंतर
तो कभी चूम रही थी हवा इन फूलों को
कैसी ये कारिगीरी है खुदा की क्या कहूँ
यकीनन शब्द नहीं पास मेरा कहने को
जी करता है रुक जाऊँ यहीं हमेशा के लिए
लेता रहूँ आनंद इस मनभावन दृश्य का
-दीपिका जैन

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