Dekhe Hain Sapne / देखे हैं सपनें (Poetry On Dream)
Dekhe
Hain Sapne / देखे हैं सपनें (Poetry On
Dream)
देखे
हैं सपनें कितने खुली आँखों से मालूम नहीं
है
कोशिश मेरी, लेकिन होंगे मुकम्मल शायद नहीं
कैसी
होगी राह इनकी कामयाबी की मुझे ज्ञात नहीं
मिलेगी
सफलता, या हाथ आएगी नाकामी जानती नहीं
काँटे
मिलेंगे राहों में, या बिछे मिलेंगे फूल मुझे पता नहीं
फिर
भी करूँगी जदोजहद पाने की मंजिल, मिलेगी पता नहीं
अधूरी
रहेंगी ख्वाहिशें, या हो जायेंगी पूरी, समझ पाती नहीं
ये
ड़र है मेरा हार का, या यकीन जीत का जानती नहीं
कितनी
है कोशिश हर सपना मुकम्मल करने की ध्यान नहीं
देखे
हैं सपनें कितने खुली आँखों से मालूम नहीं
-दीपिका जैन

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