Adbhut Nazare / अद्भुत नजारें (Poetry On Flowers )
Adbhut Nazare / अद्भुत नजारें (Poetry On Flowers )
कभी-कभी कुछ अद्भुत नजारे अचंभित कर जाते हैं
कायनात की खूबसूरती में वो चार चाँद लगा जाते हैं
देखा था निगाहों ने मेरी उपवन में द्रश्य कुछ ऐसा ही
नजर आ रहे थे पुष्प रंग-बिरंगे मुस्कुराते हुए चहुँ ओर
कुछ थे खिले, कुछ अधखिले पर थे किसी उपमा से परे
भौरों के प्रिय, अपनी सुगन्ध से महकाते इस जहाँ को
यूँ तो देखा था मंजर ये अनेक बार, पर ये था कुछ अलग
बढती है निरन्तर सुन्दरता इन फूलों की शबनम की बूँदों से
किरणें सूरज की जमाती जब सबेरे आधिपत्य अपना इन पे
अतुलनीय हो जाता नज़ारा, कुदरत का है ये एक रूप प्यारा
कभी-कभी कुछ अद्भुत नजारे अचंभित कर जाते हैं
कायनात की खूबसूरती में वो चार चाँद लगा जाते हैं
-दीपिका जैन

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