Pyar Mein Swaal / प्यार में सवाल (Poetry On Love)

Pyar Mein Swaal / प्यार में सवाल (Poetry On Love)     आसमां पे था चाँद पूनम का, चमक रहे धे सितारे बेशुमार  जमीं पे थी दूर्वा ओस से ढकी, नजर आ रहे थे पुष्प अपार  मौसम था सुहावना, चल रहीं थीं ठंडी-ठंडी हवाएँ लगातार  लेकिन कर रहे थे गुफ़्तगू हम इस हसीं मंजर से हो बेखबर  डूबे थे एक-दूजे मे, ना था खुद का पता, ना दुनिया की खबर  कैसा है ये रोग इश्क का, क्यो होता है इसका दिल पे असर  हो जाए मुकम्मल तो मुस्कता है, वरना जाता टूटकर बिखर  क्यो आता नही है नजरों को मेहबूब के सिवा कोई भी नजर  क्यो रहता है इन्तजार उसका बेवजह ही, हर पल, हर डगर  हैं सवाल ना जाने कितने जेहन में, मिलता नही जवाब मगर  जानते हैं बखूबी हम, निभाने के लिए इश्क चाहिए बढ़ा जिगर     -दीपिका जैन

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Pyar Mein Swaal / प्यार में सवाल (Poetry On Love) 


आसमां पे था चाँद पूनम का, चमक रहे धे सितारे बेशुमार

जमीं पे थी दूर्वा ओस से ढकी, नजर आ रहे थे पुष्प अपार

मौसम था सुहावना, चल रहीं थीं ठंडी-ठंडी हवाएँ लगातार

लेकिन कर रहे थे गुफ़्तगू हम इस हसीं मंजर से हो बेखबर

डूबे थे एक-दूजे मे, ना था खुद का पता, ना दुनिया की खबर

कैसा है ये रोग इश्क का, क्यो होता है इसका दिल पे असर

हो जाए मुकम्मल तो मुस्कुराता है, वरना जाता टूटकर बिखर

क्यो आता नही है नजरों को मेहबूब के सिवा कोई भी नजर

क्यो रहता है इन्तजार उसका बेवजह ही, हर पल, हर डगर

हैं सवाल ना जाने कितने जेहन में, मिलता नही जवाब मगर

जानते हैं बखूबी हम, निभाने के लिए इश्क, चाहिए बढ़ा जिगर

 

-दीपिका जैन


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