Tazurba Zindagi Ka / तजुर्बा ज़िंदगी का (Poetry On Optimism)
ज़िंदगी में कुछ हासिल करने की ख्वाहिश लिए, बढ़ा रहे थे कदम आगे
अपनों ख्वाबों को मुकम्मल करने की
आरज़ू लिए, बढ़ा रहे थे कदम आगे
सपने तो देखे हैं
बेशुमार हमने, लेकिन कितने होंगे पूरे मालूम नही हमको
राहें होंगी मुश्किल हैं अवगत इस बात
से, फिर भी चलते जाना है
हमको
कहीं हार ना जाए जीवन में कभी, ये सोच ठहरना नही है घबराकर हमको
थोड़ी मुश्किल से ही सही, मंजिल तो मिलेगी ये सोच मुस्कुराना है हमको
ज़िंदगी में कुछ
हासिल करने की ख्वाहिश लिए, बढ़ा रहे थे कदम आगे
अपनों ख्वाबों को मुकम्मल करने की
आरज़ू लिए, बढ़ा रहे थे कदम आगे
सपनें देखना
फ़ितरत है हमारी, उन्हे मुकम्मल करने की कोशिश रहेगी हमारी
आदतें चाहे बदलनी पड़े, तकलीफों से गुजरना पड़े, यकीनन
होगी जीत हमारी
गर गए हार भी तो होगा तजुर्बा ज़िंदगी
की मुश्किलों का, ये भी जीत है हमारी
जो करना था हासिल वो ना मिला, जो मिला क्या खूब मिला किस्मत है हमारी
ज़िंदगी में कुछ हासिल करने की ख्वाहिश
लिए, बढ़ा रहे थे कदम आगे
अपनों ख्वाबों को मुकम्मल करने की
आरज़ू लिए, बढ़ा रहे थे कदम आगे
-दीपिका जैन

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