Khud Ko Gunahgaar Pata Hun Main / खुद को गुनाहगार पाता हूँ मैं (A Sad Love Poetry)
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ऐ सनम तेरी आँखों से बहते आँसुओं को देख टूट जाता हूँ मैं
देख तुझे गमों के आगोश में खुद को गुनाहगार पाता हूँ मैं
किया था इश्क समझकर इबादत, आज भी सजदा करता हूँ मैं
तेरी हर ख्वाहिश हो मुकम्मल, कर यकीं दिल से चाहता हूँ मैं
होता हूँ जब तन्हा आज भी तेरे लिए मोहब्बत के गीत गाता हूँ मैं
लेकिन होती नहीं तू सामने फिर भी तुझे सोच मुस्कुराता हूँ मैं
ऐ सनम तेरी आँखों से बहते आँसुओं को देख टूट जाता हूँ मैं
देख तुझे गमों के आगोश में खुद को गुनाहगार पाता हूँ मैं
किये थे वादे मैंने तुझसे बेशुमार पर निभाए नहीं मानता हूँ मैं
हाथ पकड़ तेरा महफ़िल में, चल दिया किसी ओर संग जानता हूँ मैं
छोड़ दिया तुझे यूँ बीच मझधार, था मजबूर बार-बार कहता हूँ मैं
अब तो कर खता माफ मेरी, या फिर तुझसे कोई सजा माँगता हूँ मैं
ऐ सनम तेरी आँखों से बहते आँसुओं को देख टूट जाता हूँ मैं
देख तुझे गमों के आगोश में खुद को गुनाहगार पाता हूँ मैं
-दीपिका जैन

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