Chandni Chahun Or / चाँदनी चहुँ ओर (Poetry On Moonlight)
Chandni Chahun Or / चाँदनी चहुँ ओर (Poetry On Moonlight)
मंद-मंद मुस्काता जब चाँद, बिखर जाती चाँदनी चहुँ ओर
धीमे-धीमे से रात के अँधेरे में रोशनी बिखराती ये चहुँ ओर
मूक ही बतियाती इन फ़िज़ाओं से, नज़र आती जो चहुँ ओर
धरा को चूमती निरंतर चाँदनी, फैला अपना उजियारा चहुँ ओर
कभी उपवन में खिलते पुष्पों को निहारती दिखते जो चहुँ ओर
संग चाँद से भी करती गुफ़्तगू देखता जो उसे प्रेम से चहुँ ओर
मंद-मंद मुस्काता जब चाँद, बिखर जाती चाँदनी चहुँ ओर
धीमे-धीमे से रात के अँधेरे में रोशनी बिखराती ये चहुँ ओर
गीत बने हैं बेशुमार चाँद और चाँदनी पे गाए जाते हैं जो चहुँ ओर
बुजुर्गों द्वारा दिल से दिलचस्प क़िस्से इनके सुनाए जाते हैं चहुँ ओर
प्रेमियों के लबों पे लाता मुस्कान सानिध्य इसका, दिखता प्रेम चहुँ ओर
बच्चों का मन बहलाती इनकी हर एक कहानी, दुनिया में चहुँ ओर
मंद-मंद मुस्काता जब चाँद, बिखर जाती चाँदनी चहुँ ओर
धीमे-धीमे से रात के अँधेरे में रोशनी बिखराती ये चहुँ ओर
-दीपिका जैन

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