Na Umeed / नाउम्मीद (Poetry On Hopelessness)
उम्मीद थी बाकी, फिर भी था नाउम्मीद हर तरफ
जल रहीं थी मशालें, फिर भी था अँधेरा हर तरफ
नजर आ रही थी भीड़, फिर भी था सुनसान हर तरफ
मच रहा था कर्णभेदी शोर, फिर भी था मौन हर तरफ
शांति थी व्याप्त सबके मन में, फिर भी था क्रोध हर तरफ
मुस्कुरा रहे थे सभी खुशी से, फिर भी था रंज हर तरफ
हर कोई था उत्साहित, फिर भी था हतोत्साह हर तरफ
लहलहा रहे थे खेत हरे-भरे, फिर भी था बंजर हर तरफ
बरस रहे थे बादल बेहिसाब, फिर भी था सूखा हर तरफ
उम्मीद थी बाकी, फिर भी था नाउम्मीद हर तरफ
जल रहीं थी मशालें, फिर भी था अँधेरा हर तरफ

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