Adhuri Hain Khwahishe Adhure Hain Khwaab / अधूरी हैं ख्वाहिशें अधूरे हैं ख्वाब (Poetry On Dream)
अधूरी हैं ख़्वाहिशें, अधूरे है ख़्वाब
मुकम्मल हो जाएँगे इसकी है आस
देखे हैं मैंने ज़िंदगी में सपने बेशुमार
करूँ उन्हें पूरा रहती है इसकी प्यास
बढ़ाती हूँ क़दम हर वक़्त मुस्कुराकर
फिर भी आती नहीं है उम्मीद मुझे रास
अधूरी हैं ख़्वाहिशें, अधूरे है ख़्वाब
मुकम्मल हो जाएँगे इसकी है आस
नहीं है रुकना, नहीं है थकना
मुझको
कहती रहूँ ख़ुद से ही ये जुमला काश
कभी तो मिलेगी मंज़िल हूँ वाक़िफ़ मैं
पर उससे पहले ठहर ना जाए मेरी साँस
अधूरी हैं ख़्वाहिशें, अधूरे है ख़्वाब
मुकम्मल हो जाएँगे इसकी है आस
-दीपिका जैन

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