Silsile Pyar Ke / सिलसिले प्यार के (Poetry On Love)

इश्क़ की राहों पे कुछ कदम तुम चलो, कुछ कदम हम चलें चुभेंगे काँटे बहुत पैरों में हमारे, फिर भी ना रुकेंगे ये सिलसिले रोकेगा ज़माना, चाहेगा वो हम मोहब्बत की आग में यूँ ही जलें जाना पड़े उसे किसी भी हद तक, पर हम एक दूजे से ना मिलें इम्तिहान है ये हमारे इश्क़ का, इससे ख़ास नहीं है कुछ पहले ये यक़ीन मिलेगी कामयाबी हमें, बिछ जायेंगे फूल खिले-खिले हमारा प्यार ये अधूरा हो जायेगा पूरा, बस तू मेरा हाथ थाम ले परवाह ना कर किसी की, आने वाली ज़िन्दगी के ख्वाब सजा ले इश्क़ की राहों पे कुछ कदम तुम चलो, कुछ कदम हम चलें चुभेंगे काँटे बहुत पैरों में हमारे, फिर भी ना रुकेंगे ये सिलसिले  -दीपिका जैन




Silsile Pyar Ke / सिलसिले प्यार के (Poetry On Love) 


इश्क़ की राहों पे कुछ कदम तुम चलो, कुछ कदम हम चलें

चुभेंगे काँटे बहुत पैरों में हमारे, फिर भी ना रुकेंगे ये सिलसिले

रोकेगा ज़माना, चाहेगा वो हम मोहब्बत की आग में यूँ ही जलें

जाना पड़े उसे किसी भी हद तक, पर हम एक दूजे से ना मिलें

इम्तिहान है ये हमारे इश्क़ का, इससे ख़ास नहीं है कुछ पहले

ये यक़ीन मिलेगी कामयाबी हमें, बिछ जायेंगे फूल खिले-खिले

हमारा प्यार ये अधूरा हो जायेगा पूरा, बस तू मेरा हाथ थाम ले

परवाह ना कर किसी की, आने वाली ज़िन्दगी के ख्वाब सजा ले

इश्क़ की राहों पे कुछ कदम तुम चलो, कुछ कदम हम चलें

चुभेंगे काँटे बहुत पैरों में हमारे, फिर भी ना रुकेंगे ये सिलसिले

 

-दीपिका जैन 

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