Kahan Chala Gaya Tu Ae Bachpan / कहाँ चला गया तू ऐ बचपन (Poetry On Chiildhood)

Kahan Chala Gaya Tu Ae Bachpan  / कहाँ चला गया तू ऐ बचपन (Poetry On Chiildhood)    कहाँ चला गया तू ऐ बचपन, याद तेरी बहुत आती हैं   देखती हूँ जब खेल-खिलौनें, तेरी कमी मुझे तड़पाती हैं   जब तक जुड़ा था तू मुझसे, दुनिया से बेफिक्र मैं रहती थी   करती थी मौज़ और मस्ती ख़ूब, दोस्तों संग खेलती थी   करने पर बदमाशियाँ भरपूर, और सताने पर दूसरों को   डाँट और फटकार बड़ो की मुझको भी अक्सर पड़ती थी   छोटी-छोटी बातों पे बाकी बच्चों की तरह ज़िद मैं भी करती थी   ज्यादातर बेवज़ह ही पीछे अपने माँ को दौड़ाया करती थी   लेकिन अब छूट गया हैं तू पीछे कहीं, ढूँढने पर भी मिलता नहीं   कमी अखरती हैं तेरी बहुत, थोड़ा-सा तो रह जाता संग तू मेरे   कहाँ चला गया तू ऐ बचपन, याद तेरी बहुत आती हैं     -दीपिका जैन



Kahan Chala Gaya Tu Ae Bachpan  / कहाँ चला गया तू ऐ बचपन (Poetry On Chiildhood) 


कहाँ चला गया तू ऐ बचपनयाद तेरी बहुत आती हैं 

देखती हूँ जब खेल-खिलौनें, तेरी कमी मुझे तड़पाती हैं 

जब तक जुड़ा था तू मुझसे, दुनिया से बेफिक्र मैं रहती थी 

करती थी मौज़ और मस्ती ख़ूब, दोस्तों संग खेलती थी 

करने पर बदमाशियाँ भरपूरऔर सताने पर दूसरों को 

डाँट और फटकार बड़ो की मुझको भी अक्सर पड़ती थी 

छोटी-छोटी बातों पे बाकी बच्चों की तरह ज़िद मैं भी करती थी 

ज्यादातर बेवज़ह ही पीछे अपने माँ को दौड़ाया करती थी 

लेकिन अब छूट गया हैं तू पीछे कहीं, ढूँढने पर भी मिलता नहीं 

कमी अखरती हैं तेरी बहुत, थोड़ा-सा तो रह जाता संग तू मेरे 

कहाँ चला गया तू ऐ बचपनयाद तेरी बहुत आती हैं

 

-दीपिका जैन


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