Aa Gayi Hain Sheet Ritu / आ गयी है शीत ऋतु (Poetry On Winter season)
आ गयी हैं शीतऋतु करो मुस्कुराकर स्वागत उसका
कर लो दोस्ती फिर से रजाई और स्वेटर से तुम सब
छोड़ दो पीछे अब कूलर और पंखे की हवा ठंडी-ठंडी
सूरज की तपन से कर लो दोस्ती, हैं इसके फ़ायदे अनेक
भूला दो कुछ महीनों के लिए आइसक्रीम और कोल्डड्रिंक
लो अब मज़े तुम गरमागरम सूप, चाय और कॉफ़ी का
आ गयी हैं शीतऋतु करो मुस्कुराकर स्वागत उसका
कर लो दोस्ती फिर से रजाई और स्वेटर से तुम सब
मिलती हैं खाने को इस ऋतू में गज़क और रेवड़ी भी
लगती हैं जो बेहद ही स्वादिष्ट बूढ़े, बच्चों और जवानों को
बहुत ही प्यारी होती हैं ऋतु ये,
रहता सबको इंतज़ार इसका
लेकिन आते ही इसके जाते हैं ठिठुर सब, जल जाते हैं अलाव
आ गयी हैं शीतऋतु करो मुस्कुराकर स्वागत उसका
कर लो दोस्ती फिर से रजाई और स्वेटर से तुम सब
-दीपिका जैन

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