Thoda Muskura Le / थोड़ा मुस्कुरा ले (Poetry On Smile)
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Thoda Muskura Le / थोड़ा मुस्कुरा ले (Poetry On Smile)
वजह होने पे तो हँसता हैं ज़माना सारा
चलो आज हम बेवजह ही थोड़ा मुस्कुरा ले
फ़िलहाल तो ख़ुशी नहीं हैं ज़िन्दगी में हमारी
चलो कहीं से उसे ढूँढ लाए और थोड़ा मुस्कुरा ले
हैं ख़्वाहिश बनी रहे ये मुस्कराहट उम्रभर लबों पे हमारे
चलो तो फिर ग़मों को कह अलविदा और थोड़ा मुस्कुरा ले
शायद ये ज़माना लगा दे नज़र हँसी को तुम्हारी
चलो तो फिर इसे करे नजरदांज और थोड़ा मुस्कुरा ले
वजह होने पे तो हँसता हैं ज़माना सारा
चलो आज हम बेवजह ही थोड़ा मुस्कुरा ले
-दीपिका जैन

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