Teri Nigahon Ki Taarif / तेरी निगाहों की तारीफ (Poetry On Eyes)

Teri Nigahon Ki Taarif / तेरी निगाहों की तारीफ (Poetry On Eyes)     दो लफ़्ज़ों में कर दूँ तारीफ़ ऐसी नहीं हैं ये आँखे तेरी   इनकी खूबसूरती बयां करने को तो चाहिए फुर्सत बेशुमार    वक़्त तो मिल भी जाए, पर शब्द कहाँ से लाऊँ कहने को   लगता हैं ड़र कुछ ऐसा ना कह दूँ, हो जाए तौहीन तेरी आँखों की   कज़रारे तेरे ये नैना, यूँ तो मोहताज़ नहीं किसी तारीफ़ के   एक हसीं अदा के साथ शर्माते हुए छुपकर तेरी बंद पलकों के पीछे   कर देते हैं बयां ये खुद का ही गुणगान, अब मैं क्या कहूँ इनके लिए   फिर भी ख़्वाहिश हैं कुछ कहने की, ग़र तुझे हो मंज़ूर दिल से तो   हैं गुजारिश मेरी तुझसे, लगने ना देना नज़र ज़माने की तेरी इन निगाहों को   दो लफ़्ज़ों में कर दूँ तारीफ़ ऐसी नहीं हैं ये आँखे तेरी   इनकी खूबसूरती बयां करने को तो चाहिए फुर्सत बेशुमार       -दीपिका जैन

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Teri Nigahon Ki Taarif / तेरी निगाहों की तारीफ (Poetry On Eyes)

 

दो लफ़्ज़ों में कर दूँ तारीफ़ ऐसी नहीं हैं ये आँखे तेरी 

इनकी खूबसूरती बयां करने को तो चाहिए फुर्सत बेशुमार  

वक़्त तो मिल भी जाए, पर शब्द कहाँ से लाऊँ कहने को 

लगता हैं ड़र कुछ ऐसा ना कह दूँहो जाए तौहीन तेरी आँखों की 

कज़रारे तेरे ये नैना, यूँ तो मोहताज़ नहीं किसी तारीफ़ के 

एक हसीं अदा के साथ शर्माते हुए छुपकर तेरी बंद पलकों के पीछे 

कर देते हैं बयां ये खुद का ही गुणगान, अब मैं क्या कहूँ इनके लिए 

फिर भी ख़्वाहिश हैं कुछ कहने की, ग़र तुझे हो मंज़ूर दिल से तो 

हैं गुजारिश मेरी तुझसे, लगने ना देना नज़र ज़माने की तेरी इन निगाहों को 

दो लफ़्ज़ों में कर दूँ तारीफ़ ऐसी नहीं हैं ये आँखे तेरी 

इनकी खूबसूरती बयां करने को तो चाहिए फुर्सत बेशुमार  

 

-दीपिका जैन 

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