Bacha Lo Ladkiyon Ko / बचा लो लड़कियों को (Poetry On Girl Child)

 

Bacha Lo Ladkiyon Ko / बचा लो लड़कियों को (Poetry On Girl Child)  अपनी प्यार-प्यारी बातों से जीत लेती हैं वो दिल सबका होती हैं वो रौनक घर की, बिन उनके लगता सब सूना-सूना  दुनिया में फिर भी कुछ नादाँ लोग करते हैं नफ़रत इनसे मिटा देते हैं बड़ी बेरहमी से नामोंनिशां इनका इस जहाँ से बेटे की चाह में बन जाते वो अंधे, आती नहीं नज़र बेटी की मासूमियत पूछती जब वो चीख-चीखकर कसूर अपना, उसे आँखे दिखला देते  अपनी प्यार-प्यारी बातों से जीत लेती हैं वो दिल सबका होती हैं वो रौनक घर की, बिन उनके लगता सब सूना-सूना  कैसी ये विडंबना हैं, मज़बूर हैं वो जननी हैं जो इस संसार की भरी हैं नफरत दिलों में उसके लिए, मनाते हैं दुःख उसके आगमन पर वक़्त हैं अभी भी रोक दो ये अत्याचार, और बचा लो लड़कियों को यक़ीनन कर देंगी वो तुम्हारा हर कसूर माफ़ मुस्कुराते हुए  अपनी प्यार-प्यारी बातों से जीत लेती हैं वो दिल सबका होती हैं वो रौनक घर की, बिन उनके लगता सब सूना-सूना  -दीपिका जैन

Image by Aamir Mohd Khan from Pixabay



Bacha Lo Ladkiyon Ko / बचा लो लड़कियों को (Poetry On Girl Child)

 

अपनी प्यार-प्यारी बातों से जीत लेती हैं वो दिल सबका

होती हैं वो रौनक घर की, बिन उनके लगता सब सूना-सूना

 

दुनिया में फिर भी कुछ नादाँ लोग करते हैं नफ़रत इनसे

मिटा देते हैं बड़ी बेरहमी से नामोंनिशां इनका इस जहाँ से

बेटे की चाह में बन जाते वो अंधे, आती नहीं नज़र बेटी की मासूमियत

पूछती जब वो चीख-चीखकर कसूर अपना, उसे आँखे दिखला देते

 

अपनी प्यार-प्यारी बातों से जीत लेती हैं वो दिल सबका

होती हैं वो रौनक घर की, बिन उनके लगता सब सूना-सूना

 

कैसी ये विडंबना हैं, मज़बूर हैं वो जननी हैं जो इस संसार की

भरी हैं नफरत दिलों में उसके लिए, मनाते हैं दुःख उसके आगमन पर

वक़्त हैं अभी भी रोक दो ये अत्याचार, और बचा लो लड़कियों को

यक़ीनन कर देंगी वो तुम्हारा हर कसूर माफ़ मुस्कुराते हुए

 

अपनी प्यार-प्यारी बातों से जीत लेती हैं वो दिल सबका

होती हैं वो रौनक घर की, बिन उनके लगता सब सूना-सूना

 

-दीपिका जैन 



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