Subah-Subah Ka Aalam / सुबह सुबह का आलम (Poetry On Morning)

Subah-Subah Ka Aalam / सुबह सुबह का आलम (Poetry On Morning)     सुबह-सुबह का आलम इतना प्यारा होता हैं   चलती हैं जब ठंडी-ठंडी बयार, अच्छी लगाती हैं   उड़ते हैं पँछी आसमां में, अपनी ही धुन में गाते हुए   फूल भी रंग-बिरंगे बढ़ाते हैं शान बगियाँ की   और करती हैं आकर्षित सबको महक उनकी   बेहद ही मनमोहक होता हैं दृश्य सुबह-सुबह का   कर देती हैं शांत मन हर इंसा का इसकी ताज़गी   सुबह-सुबह का आलम इतना प्यारा होता हैं   चलती हैं जब ठंडी-ठंडी बयार, अच्छी लगाती हैं      -दीपिका जैन
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Subah-Subah Ka Aalam / सुबह सुबह का आलम (Poetry On Morning)

 

सुबह-सुबह का आलम इतना प्यारा होता हैं 

चलती हैं जब ठंडी-ठंडी बयार, अच्छी लगाती हैं 

उड़ते हैं पँछी आसमां में, अपनी ही धुन में गाते हुए 

फूल भी रंग-बिरंगे बढ़ाते हैं शान बगियाँ की 

और करती हैं आकर्षित सबको महक उनकी 

बेहद ही मनमोहक होता हैं दृश्य सुबह-सुबह का 

कर देती हैं शांत मन हर इंसा का इसकी ताज़गी 

सुबह-सुबह का आलम इतना प्यारा होता हैं 

चलती हैं जब ठंडी-ठंडी बयार, अच्छी लगाती हैं 

 

-दीपिका जैन


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