Dekha Tha Ek Khwaab / देखा था एक ख्वाब ( Poetry On Struggle In Life)
देखा था एक ख़्वाब हमने आसमां में उड़ने का
राहें थी मुश्किल, पर हौंसले थे बुलंद हमारे
इसलिए शायद बढ़ते जा रहे थे
कदम मंज़िल की और
लेकिन कभी थक जाते, तो कभी हार जाते हिम्मत
और फिर रुक जाते, क्या करें, क्या ना करें
ये सोच
अगले ही पल आता एक ख्याल
ज़ेहन में हमारे
ग़र यूँ रुक जायेंगे क़दम तो मुकम्मल होंगे कैसे सपने
कैसे मिटा पायेंगे हम ज़िंदगी के अंधेरों को जला चिलमन
और आते ही ख्याल ये, चल पड़ते क़दम बिन रुके हमारे
देखा था एक ख़्वाब हमने आसमां में उड़ने का
राहें थी मुश्किल, पर हौंसले थे बुलंद हमारे
-दीपिका जैन

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