Khaali Haath (Poetry On Life)
खाली हाथ आए थे, खाली हाथ ही जायेंगे
यूँ तो वाकिफ हैं सभी इस बात से दुनिया में
फिर भी थमता नहीं सिलसिला ख़्वाहिशों का
चाहता नहीं कोई यहाँ रिश्ते अनमोल निभाना
चाह हैं सबकी धन-धान्य से संपन्न हो जाना
खाली हाथ आए थे, खाली हाथ ही जायेंगे
यूँ तो वाकिफ हैं सभी इस बात से दुनिया में
सोचती हूँ ऐसा क्यो है क्या वजह है इसकी
यकीनन खुदा ने नही बनाई फितरत ये इन्सा की
वो तो खुद बहाता होगा आँसू देख ये नज़ारा
खाली हाथ आए थे, खाली हाथ ही जायेंगे
यूँ तो वाकिफ हैं सभी इस बात से दुनिया में

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